९ जनवरी उलगुलान दिवस

           


                         ९ जनवरी उलगुलान दिवस 

क्रांतिसूर्य महामानव धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जल,जंगल,जमीन,अग्रेजों और सवकारों के शोषण के खिलाफ फूंक रहे थे|इस कारण उलीहातु उनके जन्म स्थान से कुछ दूरी पर डोंबरी बुरु पहाड़ पर जन सभा का आयोजन किया था|उस सभा में सैकड़ों आदिवासी बूढ़े ,युवा , बच्चे, महिला इस जनसभा में शामिल थे|लेकिन अंग्रेजों को किसी गद्दरों की वजह से डोंबरी बुरु पहाड़ पर बिरसा मुंडा के नेतृत्व में सभा होने की खबर मिलते ही इस सभा को भनक भी नहीं लगने दी चारों तरफ से अंग्रेज सैनिकों ने घेर लिया|जन अग्रेजों ने बिरसा मुंडा को हतियार डालने के लिए ललकारा लेकिन बिरसा मुंडा और उनके समर्थकों ने हतियार डालने बजाय शाहिद होना उचित समझा|फिर क्या था अंग्रेज आदिवासियों पर कहर बनकर टूट पड़े इस दोरान अंग्रेजों ने अंधाधूंन फायरिंग में सैकड़ों आदिवासी शहीद हुए|लेकिन बिरसा मुंडा समर्थकों डटकर सामना किया लेकिन इसी दौरान बिरसा मुंडा समर्थकों ने अपनी जान बचाए की परवा न करते हुए बिरसा मुंडा को अपनी जान बचाने की सलाह दी और इस पहाड़ी से जाने को कहा लेकिन फिर भी बिरसा मुंडा ने नही मान रहे थे लेकिन समर्थकों ने कहा आपका हम आज नही तो कल शहीद होने लेकिन हमारी जान से बेहतर आपकी जान बचाना उचित है|आपही हो जो आदिवासी को अपने हक्क अधिकार दिला सकते हो आप रहे उलगुलान जारी रहेगा| कई बहस के बाद बिरसा मुंडा अग्रेजों को चकमा देकर निकल आए|लेकिन इस डुबारी बुरू पहाड़ी हत्याकांड में बूढ़े,युवा,माता,बच्चे सैकड़ों आदिवासी अपनी शहादत दी| इस हत्याकांड को जालियन वाला बाग से पहले का भी हत्याकांड कहा जाता है|९ जनवरी शाहिद हुए आदिवासी क्रांतिवीर रोंके यादों में उलगुलान दिवस मनाया जाता हुए|

            ९ जनवरी उलगुलान दिवस जोहार अभिवादन 💐💐🚩🏹

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