आदिवासी योद्धा वीर बुधु भगव जयंती जोहार अभिवादन
लरका आंदोलन का अमर शहीद वीर बुधू भगत और अंगरेजी बंदूक भारत की आजादी की लड़ाई में सन् 1857 या उसके बाद, देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों में कुछ के नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं। किन्तु 1857 ई. से पहले और बाद भी आदिवासी समुदायों के वीरों के अधिकांश नाम गुमनामी के ढेर में छिपा है। छोटानागपुर (वर्तमान झारखण्ड-प.बंगाल) के इतिहास में भी उस स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे अनेक वीर सपूत पैदा हुए जिन्होंने, अपने समाज और देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी। ऐसे कुछ महान सपूतों में प्रमुख हैं - वीर बुधू भगत, बिरसा मुण्डा, तिलका मांझी, जतरा भगत, गणपत राय, शेख भिखारी ठाकुर, ठाकुर विश्वानाथ शाहदेव इत्यादि। इन गुमनाम शहीद सपूतों में कुछ नाम ऐसे है, जिनका त्याग और वलिदान इतिहास में चर्चित नामों में से किसी भी कसौटी पर कम नहीं है, शायद उन सपूतों कों को वह सम्मानननहीं मिला जिसके वे हकदार हैं। उन्हीं नामों में छोटानागपुर के अमर शहीद वीर बुधू भगत का नाम प्रमुख है, जिनका इतिहास अभी भी पूरी तरह समाज के सामने प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। इतिहासकारों ने झारख...