भारत स्वतंत्रता संग्राम में इतिहास के पन्नो में आदिवासी क्रांतिवीरोंका इतिहास नही लिखा गया|
भारत स्वतंत्रता संग्राम में इतिहास के पन्नो में आदिवासी क्रांतिवीरोंका इतिहास नही लिखा गया| भारत आजादी के ७६ साल इस वर्ष मनाया गया लेकिन इस भारत वर्ष के लिए शहीद होनेवाले क्रांतिविरोंका इतिहास हमे पढ़ाया गया|जिसमे १८५७ से आजादी की पहली लड़ाई अग्रेजी सत्ता के विरोध में मंगल पांडे ने विद्रोह किया था|और कई स्वतंत्र सेनानी हो गए| स्वतंत्रता के लिए शहीद होनेवाले मंगल पांडे,वीर भगतसिंग,वीर राजगुरु,वीर सुकदेव,वीर चंद्रशेखर आजाद,वीर सुभाष चंद्र बोस और अन्य क्रांतिवीर का इतिहास पढ़ाया गया|इसी तरह स्वतंत्र सेनानी जिन्होंने अपना जीवन भारत स्वतंत्रता के लिए बढ़ा योगदान दिया।जैसे महात्मा गांधी,पंडित जवाहरलाल नेहरू,लाल बहादुर शास्त्री,सरदार वल्लभभाई पटेल,लोकमान्य तिलक और अन्य स्वतंत्र सेनानी का इतिहास पढ़ाया गया और लिखा गया|लेकिन आदिवासी का इतिहास लिखनें में इतिहासकारोंकी लिखनेवाली स्याही खत्म हो गई या जान बुझकर आदिवासी क्रांतिविरोंका इतिहास नही लिखा नाही हमे पढ़ाया गया|जो भारत स्वतंत्रता पहला बिगुल १८ शताब्दी_१७८५ में तिलका मांझी उर्फ जबरा पहाड़िया के नाम से प...