आदिवासी क्रांतिकारी महायोद्धा ११ अप्रैल २०२६ वीर खाज्या नाईक शहादत दिवस जोहार अभिवादन
आदिवासी क्रांतिकारी महायोद्धा ११ अप्रैल २०२६ वीर खाज्या नाईक शहादत दिवस जोहार अभिवादन सातपुड़ा प्रदेश के भील आदिवासी नायक क्रांतिवीर खाज्या नाईक 1831 से 1851 तक अंग्रेजों की सेवा में थे। उन्होंने सेंधवा घाट क्षेत्र से यात्रा करने वाले व्यापारियों की सुरक्षा का अत्यंत कठिन कार्य किया। वे गोंड-भील पुलिस दल के प्रमुख थे, जो घने जंगलों से गुजरने वाली बैलगाड़ियों की सुरक्षा करते थे। उनके हाथों एक डाकू मारा गया, जिसके कारण उन पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें 10 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई। 1855 में सजा पूरी करने के बाद वे अपनी नौकरी पर लौटना चाहते थे, लेकिन उसी समय 1857 की क्रांति का माहौल तेजी से बन रहा था। जब देश में अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर खड़े होने वाले बहुत कम थे, तब खाज्या नाईक ने विद्रोह का झंडा उठा लिया।उनके साथी भीमा नायक और मेवश्या नायक उनके साथ जुड़ गए। उन्होंने 2200 से 2500 आदिवासियों को संगठित किया और ब्रिटिश उपनिवेशों व खजानों पर हमले शुरू कर दिए। जब उन्होंने अंग्रेजों को युद्ध के लिए ललकारा, तो उन्हें हनुमंत राव भील का साथ मिला|आसपास के गांवों में क्रांतिकारी ज्...